खेती से आमदनी नहीं, फिर भी इन बुजुर्गों ने नहीं छोड़ा जज्बा, खेती की कहानी सुनिए बुजुर्गों की जुबानी

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के #ऑर्गैनिक #उत्पाद कास्तकारों का जीवन बदल सकते हैं।बशर्ते इन्हें सही बाजार और सही कीमत मिले। सरकार को इस दिशा में विशेष प्रयास करने की जरूरत है। रानीखेत में दीर्घायु प्रोडक्ट्स इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है। हालांकि पहाड़ों में अधिकतर स्थानों पर बाजार और कीमत के अभाव में हल्दी उत्पादकों के जीवन में रंग अभी फीके ही हैं। बुजुर्ग किसानों का कहना है कि पलायन के चलते उनके बच्चे शहरों में बस गए हैं। आजीविका के लिए खेती एकमात्र सहारा है, लेकिन जंगली जानवर खेती को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस वजह से हल्दी, अदरक आदि के उत्पादन में थोड़ी सी गुंजाइस दिखती है। लेकिन विडंबमना ये है कि इन उत्पादों को भी सही बाजार और दाम नहीं मिल पाता, लिहाजा इन्हें अपने रिश्तेदारों में बांटना पड़ता है।

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