सिंगटाली पुल के शिलापट से सांसद बलूनी का नाम गायब,  भाजपा में सियासी हलचल, पूर्व सीएम ने उठाए सवाल

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PAURI GARHWAL: कई साल तक सरकारी फाइलों में झूलता रहा बहुचर्चित सिंगटाली पुल शिलान्यास के बाद फिर एक बार चर्चा में है। इस बार शिलान्यास के शिलापट से गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का नाम गायब होने को लेकर सियासी चर्चाएं हैं। शिलापट में सीएम धामी, यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट औऱ सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के नाम तो हैं लेकिन गढ़वाल सांसद बलूनी का नाम नहीं है। इसी मुद्दे पर अब पूर्व सांसद और पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी कहा है कि सांसद बलूनी का नाम भी इसमें होना चाहिए था।

पौड़ी गढ़वाल और यमकेश्वर क्षेत्र को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित सिंग्टाली पुल के शिलान्यास के बाद अब शिलापट्ट को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सिंग्टाली पुल लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। इस परियोजना को लेकर सांसद अनिल बलूनी लगातार सक्रिय रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने इस संबंध में मुख्य सचिव से भी मुलाकात की थी और परियोजना को गति देने के लिए लगातार प्रयास किए थे। ऐसे में शिलापट्ट पर उनका नाम शामिल न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अनिल बलूनी पुल निर्माण के लिए कई बार मुख्य सचिव को भी पत्र लिख चुके हैं। ऐसे में शिलापट में बलूना का नाम होना उनके समर्थकों को अखर रहा है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि विकास कार्यों से जुड़े शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों में संबंधित जनप्रतिनिधियों का नाम शिलापट्ट पर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का नाम भी शिलापट्ट में शामिल किया जाना उचित होता।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष जहां इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देख रहा है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सांसद का नाम शिलापट्ट से क्यों गायब रखा गया। हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में सिंग्टाली पुल का शिलापट्ट अब विकास से ज्यादा सियासत का विषय बनता नजर आ रहा है।

उधर सिंगटाली मोटर पुल संघर्ष समिति का कहना है कि इस कार्यक्रम में हमारी समिति ने भी प्रतिभाग नहीं किया। हमें भी जानकारी नहीं दी गई थी। यह कार्यक्रम राजकीय रहा होगा, इसलिए शायद जानकारी गोपनीय रखी गई होगी। समिति ने कहा कि सांसद अनिल बलूनी जी का इस पुल के निर्माण के लिए हमारे संघर्ष में बहुत योगदान रहा, हमारी समिति उनके पास कही बार गई और उन्होंने हर बार राज्य सरकार, मुख्यमंत्री जी और मुख्य सचिव को पुल के निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया। मुख्य सचिव को तो कही बार पत्र लिखकर यह तक पूछा कि 2006 से अब तक क्या क्या हुआ इस योजना में!! शिलापट्ट पर नाम लिखना आदि राज्य सरकार, लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन का विवेक हैं, पर हमारी समिति उनके समर्थन और सहयोग का हमेशा आभारी रहेगी। उनके साथ हुई वार्ताएं हम सार्वजनिक नहीं कर सकते पर उनका सहयोग और समर्थन हमें हमेशा मिला है। बलूनी जी का पैतृक गांव भी इस पुल से जुड़ रहा है तो उनका इस पुल से भावनात्मक लगाव रहा है। उन्होंने हमे सदैव आश्वासन दिया कि पुल जरूर बनेगा। आज पुल का विधिवत शिलान्यास हुआ है आने वाले समय में पुल का लोकार्पण होगा। जिस भी व्यक्ति और संस्था ने हमारा सहयोग किया उनको हम हमेशा याद करते रहेंगे यही हमारे संस्कार हैं।

 

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