CM धामी की मांग, हिमालयी राज्यों को मिले पर्यावरणीय सेवाओं का अनुदान, नीति आयोग की बैठक में हुए शामिल

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NEW DELHI: मुख्यमंत्री पुष्कर धामी शुक्रवार को दिल्ली में नीति आयोग की 8वीं जनरल काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता मे हुई बैठकर में सीएम ने राज्य के लिए ग्रीन बोनस की मांग उठाई।

धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की कड़ी में उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य- सशक्त उत्तराखण्ड @ 25 की अवधारणा के आधार पर तेज गति से कार्य प्रारम्भ कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नीति आयोग की तर्ज पर राज्य में स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर इंपावरिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखण्ड का गठन किया है।

ग्रीम बोनस की मांग पर सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड का 70 फीसदी क्षेत्र वन, बुग्याल और ग्लेशियर के संरक्षण करके पूरे राष्ट्र को पर्यावरणीय सेवा देता है। इसलिए वित्तीय संसाधनों के आवंटन एवं नीति निर्माण में उत्तराखंड के इस तथ्य को भी सम्मिलित किए जाना चाहिए। पर्यटन गतिविधियों से उन्हें राजस्व का लाभ तो होता है लेकिन इसका नुकसान वहां के पर्यावरण को काफी हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को इन राज्यों को ग्रीन अनुदान देने पर विचार करना होगा

सीएम के मुताबिक आईआईएफएम, भोपाल के एक अध्ययन के अनुसार उत्तराखण्ड के वनों से प्राप्त होने वाली इन सेवाओं का न्यूनतम मौद्रिक मूल्य 95,000 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष है।

*ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा 25 मेगा वाट से कम क्षमता की परियोजनाओं के अनुमोदन और क्रियान्वयन का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए। इससे प्रदेश में छोटी-छोटी जल विद्युत परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं.

* नदी जोड़ो परियोजना के लिए भी मुख्यमंत्री ने विशेष वित्तीय सहायता एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने की गुजारिश की।

*  केंद्र पोषित अधिकांश योजनाएं वन साइज फिट ऑल के आधार पर बनाती है, जो राज्यों की अपनी विशिष्ट परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होती है। इसलिए उत्तराखंड जैसे पर्वती राज्यों के लिए अलग से केंद्र पोषित योजनाएं देने का प्रावधान होना चाहिए।

* उत्तराखंड में लागू औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2017 के अंतर्गत प्राप्त प्रोत्साहन वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका है, जबकि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में इसी प्रकार की औद्योगिक नीति वर्तमान में चल रही है। मुख्यमंत्री ने मांग की कि औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को उत्तराखंड में भी आगामी 5 वर्षों के लिए विस्तारित किया जाए।

 

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