राष्ट्रीय खेलों में पहाड़ की गोल्डन गर्ल का कमाल, कभी बॉक्सिंग के लिए बोर्ड परीक्षा छोड़ी थी, अब जीता गोल्ड मेडल  

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PITHORAGARH:  38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड एथलीट बेहद मुश्किल चुनौतियों से उभरकर खुद को साबित करने में जुटे हैं। बॉक्सिंग प्रतियोगिता में पिथौरागढ़ की निवेदिता कार्की ने गोल्ड मेडल हासिल किया है। निवेदिता ने 48 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में हरियाणा की बॉक्सर कल्पना को 5-0 के अंतर से हराया। इस गोल्ड के साथ उत्तराखंड के 6 गोल्ड मेडल हो गए हैं और कुल 40 पदकों के साथ 13वें स्थान पर आ गया है।

पहाड़ की गोल्डन गर्ल निवेदिता की कहानी बड़ी संघर्ष भरी औऱ दिलचस्प है। निवेदिता पिथौरागढ़ के दुर्गम गांव रणुआ से आती हैं। बॉक्सिंग के लिए वो हमेशा से जुनूनी रही हैं। 2019 में उनका चयन खेलो इंडिया योजना के तहत नेशनल एकेडमी रोहतक हरियाणा के लिए हुआ था। इसी दौरान निवेदिता ने अपने हुनर का लोहा मनवाया और वो जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चुनी गई। निवेदिता की 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं सर पर थी, लेकिन उन्होंने परीक्षा की बजाए बॉक्सिंग को चुना और ट्रेनिंग में जुट गई। 2020 में अंतरराष्ट्रीय जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने फैसले को सही साबित किया। इसके बाद 2021 में जार्डन में आयोजित एशियन यूथ जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी निवेदिता ने गोल्ड मेडल जीता। दुबई में आयोजित प्रतियोगिता में भी रजत पदक जीता। और इजराइल में भी गोल्डन गर्ल का खिताब जीता।

पिछले एक डेढ़ साल से निवेदिता लगातार इंजुरी से जूझती रही, लेकिन उन्होंने नेशनल गेम्स में शानदार वापसी की। 38वें राष्ट्रीय खेलों में पहली बार निवेदिता ने हिस्सा लिया और दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। निवेदिता के दमदार खेल की खास बात ये रही कि सभी मुकाबलों में पांचों जजों ने उनके पक्ष में स्कोर दिया। क्वार्टर फाइनल में निवेदिता ने पंजाब की बॉक्सर को 5-0 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में चंडीगढ़ की बॉक्सर रितिका को 5-0 से हराया। और फिर फाइनल में हरियाणा की बॉक्सर कल्पना को भी 5-0 के अंतर से हराया।

निवेदिता का परिवार इस समय देहरादून में रहता है। उसके पिता बहादुर सिंह कार्की इंदिरा गांधी एयरपोर्ट इमीग्रेशन ऑफिसर पद पर हैं और मां पुष्पा कार्की गृहिणी है।

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