केदारनाथ धाम को कचरा मुक्त करने की अनोखी मुहिम #CarryMeBack, मंदिर से वापस जाओ, दो किलो कचरा ले जाओ

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KEDARNATH: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पूरे शवाब पर है। केदारनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है। और इसी के साथ बढ़ रही है एक गंभीर चुनौती…कचरे की। वो कचरा जो लाखों यात्री अपने साथ प्लास्टिक की बोतलें, पैकेज्ड फूड के रैपर, डिस्पोजेबल कप के रूप में लेकर पहाड़ों तक पहुंचते हैं। इसका बड़ा हिस्सा पहाड़ों, जंगलों और नदियों में ही छूट जाता है, जिससे हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी पर दबाव बढ़ता है।

मंदिर आते वक्त सब अपने साथ ये ले तो जाते हैं, लेकिन उसकी वापसी का कोई उपाय नहीं सूझता। लिहाजा केदारपुरी में लग जाता है कचरे का अंबार। और ये कचरा न सिर्फ केदारपुरी की स्वच्छता और सुंदरता के लिए खतरा है, बल्कि हिमालय की इकोलॉजी के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहा है। शिव भक्त प्रदीप सांगवान उनकी संस्था हीलिंग हिमालयन फाउंडेशन कई साल से हिमालयी क्षेत्रों में सफाई अभियान चला रही है। केदारनाथ धाम में बढ़ रह कचरे को वापस ले जाने के लिए भी प्रदीप सांगवान ने अनोखी मुहिम शुरू की है जिसका नाम कैरी मी बैक।

उन्होंने एक यात्री, एक विचार और एक किलो कचरा हटाने का लक्ष्य रखा है। यानि जो भी यात्री केदारनाथ आ रहे हैं, वापसी में उनसे कचरा वापस ले जाने की अपील की जा रही है। प्लास्टिक या अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को कॉम्पैक्ट करके एक किलो, दो किलो., ढाई किलो, 5 किलो तक के बैग बनाए गए हैं। प्रदीप सांगवान के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य यह है कि यदि केदारनाथ आने वाले केवल 1 लाख श्रद्धालु भी अपने साथ 1-1 किलो कचरा वापस नीचे लेकर आएं, तो पहाड़ों से 100 टन कचरा हटाया जा सकता है।

कई लोग इस अनोखी मुहिम में भागीदार बन रहे हैं। अभियान के शुरुआती 10 दिनों में ही केदारनाथ धाम से एक हजार किलोग्राम कचरा गौरीकुंड बेस तक वापस लाया जा चुका है। प्रदीप सांगवान की इस पहल को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई लोग इसे देश के अन्य धार्मिक स्थलों, नदियों और जंगलों में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

 

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