लालढांग चिल्लरखाल मार्ग से अब गुजर सकेंगे सभी तरह के वाहन, सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी ने बताया

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KOTDWAR: गढ़वाल और कुमाऊं के बीच दूरियां मिटाने वाले बहुप्रतीक्षित लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग को लेकर एक और अच्छी खबर सामने आई है। इस रोड़ से अब सभी तरह के वाहन गुजर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी ने न्यायालय के आदेश में प्रयुक्त “कमर्शियल वाहन” शब्द को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने फेसबुक पर लिखा है कि ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। खुशखबरी साझा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने आज इस मार्ग पर सवारी गाड़ियों, सरकारी बसों, गढ़वाल मोटर ओनर यूनियन (GMOU) द्वारा संचालित बसों, स्कूल बसों, किसानों के ट्रैक्टर एवं भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के पूर्ण संचालन की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी के मुताबिक अब इस मार्ग से सवारी गाड़ियां, सरकारी बसें, गढ़वाल मोटर ओनर यूनियन (GMOU) की बसें, स्कूल बसें, किसानों के ट्रैक्टर और भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के बिना रोकटोक गुजर सकेंगे। हालांकि इन वाहनो को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच ही आने जाने की अनुमति होगी, जबकि एंबुलेंस के आवागमन पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।

इस फैसले से क्षेत्र की जनता, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों तथा आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत मिलेगी। बता दें कि 11.5 किमी लंबे लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन बार बार पर्यावरणीय नियमों का हवाला इस सड़क के आड़े आ रहा था। 13 फऱवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मार्ग के निर्माण पर लगी रोक को हटा दिया था, लेकिन आदेश में कमर्शियल वाहनों पर पाबंदी के संबंध में एक फैसले से भ्रम की स्थिति हो गई थी। अब सीईसी के आदेश से ये भ्रम भी दूर हो गया है।

बता दें कि राज्य सरकार ने भी लालढांग चिल्लरखाल मार्ग के निर्माण की कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया है। जल्द ही इसके टेंडर भी जारी हो सकते हैं।

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