विधानसभा चुनाव: BJP के नहले पर कांग्रेस का दहला, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या संजीव आर्या की घरवापसी
डायलॉग डेस्क : विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दलबदल के दौर में अब तक कांग्रेस को झटके लग रहे थे। लेकिन अब कांग्रेस ने भाजपा ने कैबिनेट मंत्री छीनकर जोर का झटका धीरे से दिया है। बाजपुर से विधायक व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या और उनके विधायक बेटे संजीव आर्या ने (Yashpal arya and sanjeev aarya joins congress, resigns from ministry) भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में घरवापसी की है। यशपाल आर्या व संजीव आर्या दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस में वापस शामिल हुए। माना जा रहा है कि पार्टी में उपेक्षा और दलितों के मुद्दों पर लापरवाही के चलते यशपाल आर्या नाराज चल रहे थे।
दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। यशपाल की घरवापसी भाजपा के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। माना जाता है कि यशपाल आर्या पार्टी में उपेक्षा से नाराज चल रहे थे। कुछ दिन पूर्व सीएम धामी उन्हें मनाने उनके घर पहुंचे थे, लेकिन आर्या का मन नहीं बदला।

यशपाल आर्या के कांग्रेस में जाने के पीछे एक बड़ा कारण तराई के क्षेत्रों में बीजेपी का किसानों के मुद्दे पर खासा विरोध होना भी बताया जा रहा है ऐसे में बाजपुर सीट से जीतना यशपाल आर्य के लिए बीजेपी के टिकट पर मुश्किल साबित हो सकता था। काफी समय से कैबिनेट की बैठकों में भी यशपाल आर्य दलितों के मुद्दों को लेकर कैबिनेट की बैठक में खासे मुखर थे।

दलबदल के दौर में अभी भाजपा सरकार में मंत्री और कई अन्य विधायकों की भी कांग्रेस में घर वापसी की संभावना है। अब तक भाजपा ही कांग्रेस को झटके दे रही थी, लेकिन यशपाल की घरवापसी करवाकर कांग्रेस ने भाजपा को उसी की चाल से ढेर किया है। यशपाल आर्या कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा सरकार में भी वे परिवहन मंत्री के पद पर थे। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था।
दलित सीएम का दांव!
पंजाब में दलित सीएम बनाकर कांग्रेस ने दलित कार्ड चला था। इसी दांव को लपककर हरीश रावत ने उत्तराखंड में भी दलित सीएम का दांव चला था। यशपाल आर्या का राजनीतिक अनुभव औऱ कद कांग्रेस के लिए फायदेमंद तो होगा ही, अगर पार्टी ने दलित सीएम के चेहरे के तौर पर आर्या को प्रोजेक्ट किया तो बड़ा तबका कांग्रेस की झोली में जाएगा। इस दांव से भाजपा के रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।
