बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी: CM ने कहा, किसी को नहीं छोड़ेंगे, BKTC अध्यक्ष ने कहा, बदरी केदार आकर जवाब दें गोदियाल
DEHRADUN: बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गोदियाल पर पलटवार किया है। उधर मुख्यमंत्री धामी ने फिर दोहराया है कि ये पाप गौहत्या जैसा पाप है, इसमें जो भी दोषी शामिल होगा उसको कतई बख्शा नहीं जाएगा।
बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले पर एक दिन पहल गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी को बहस की चुनौती दी थी, गोदियाल प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए प्रेसक्लब पहुंचे, लेकिन द्विवेदी नहीं पहुंचे। एक दिन बाद द्विवेदी ने गणेश गोदियाल पर पलटवार किया है। गोदियाल के आरोपों और सार्वजनिक बहस से भागने के आरोप पर हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिरों से संबंधित आरोपों पर बहस सड़क या किसी अन्य स्थान पर नहीं हो सकती है। इसलिए गोदियाल को आरोपों का जवाब बदरी विशाल व बाबा केदार के दरबार में आकर देना चाहिए।
द्विवेदी ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल का आरोप है कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गणना ड्यूटी में बीकेटीसी अध्यक्ष ने नियुक्त किया। जबकि नौटियाल अप्रैल 2025 से गणना ड्यूटी में तैनात है। उस समय उनके पास बीकेटीसी अध्यक्ष का दायित्व नहीं था। द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी में वैयक्तिक सहायक का पद 1983 से है लेकिन इस पर नियमों को ताक पर रख कर नौटियाल को पदोन्नति दी गई।
बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम के अनुसार मंदिर कोष से अन्य विकास कार्य नहीं कराए जा सकते। बिनसर मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं है, इसके बावजूद भी गोदियाल के कार्यकाल में मंदिरों के जीर्णाद्धार के लिए राशि दी गई थी।
CM ने कहा, न मामले को दबाएंगे, न दोषियों को छोड़ेंगे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। जैसे ये प्रकरण हमारे सामने आया, हमने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर फौरनम इसकी जांच बिठाई और कार्रवाई शुरू की, हमने इसमें कुछ भी छुपाने का काम नहीं किया। सीएम ने दोहराया कि बदरीनाथ धाम से पैसे चुराना गौहत्या जैसा पाप है। इसमें जो भी दोषी होगा उस पर सकथ् कतारर्वाई की जाएगी, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मंगलवार को प्रेसवार्ता में गोदियाल ने कहा था कि मुझे चुनौती देने वाले खुद मैदान छोड़ कर भाग गए। जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में 32 कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसमें नौटियाल का नाम भी शामिल था। वर्ष 2014 में शासन की स्वीकृति के बाद नियमितीकरण किया गया।