चंपावत के राहुल का कमाल, 40 हजार में बना दी सोलर कार, 70 किमी तक है रफ्तार
CHAMPAWAT: पहाड़ के युवाओं में प्रतिभा और तकनीकी सोच की कोई कमी नहीं है। कुछ दिन पहले अल्मोड़ा के युवा ने फ्लाइंग कार बनाकर देशभर में सुर्खियां बटोरी, और अब चंपावत के एक युवा ने धूप से चलने वाली इलेक्ट्रिक कार बनाई है।
चम्पावत के मादली के रहने वाले 20 साल से राहुल नरियाल एक महीने की मेहनत और करीब 40 हजार रुपये की लागत से ऐसा सोलर वाहन तैयार किया है, जिसे वह पेट्रोल के बजाय मुख्य रूप से सौर ऊर्जा से चलाने का दावा करते हैं। राहुल के इस प्रयोग की इन दिनों क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है। सड़क पर जब राहुल अपने बनाए वाहन को लेकर निकलते हैं तो लोग रुककर उसे देखने लगते हैं। कई लोग वाहन की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहे हैं। राहुल के मुताबिक पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत को देखते हुए उनके मन में ऐसा वाहन तैयार करने का विचार आया, जो पेट्रोल पर निर्भर न हो। इसी सोच को उन्होंने प्रयोग का रूप दिया और करीब एक महीने में वाहन का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।
राहुल ने बताया कि प्रोजेक्ट पर करीब 40 हजार रुपये खर्च हुए। इसके लिए उन्होंने कुछ समय तक अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए मिलने वाले पैसों में से बचत की और उसी रकम से वाहन के लिए आवश्यक सामान खरीदा। वाहन में सोलर प्लेट, बैटरी समेत कार में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं। राहुल की मानें तो एक बैटरी से 75 किलोमीटर की दूरी तय की जा सकती है। इस कार की अधिकतम स्पीड 65 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा तक है।
धूप नहीं तो बैटरी से चलेगी
राहुल के मुताबिक इस सोलर कार का प्रमुख ऊर्जा स्रोत सूर्य से मिलने वाली सौर ऊर्जा है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम हमेशा अनुकूल नहीं रहता, इसलिए उन्होंने वाहन में सामान्य बिजली से बैटरी चार्ज करने की सुविधा भी रखी है। धूप कम होने अथवा लंबे समय तक मौसम खराब रहने पर बैटरी को बिजली से चार्ज किया जा सकता है। वाहन में दो बैटरियां लगाई गई हैं। उनके मुताबिक एक बैटरी से करीब 75 किलोमीटर तक सफर किया जा सकता है, जबकि दोनों बैटरियों के इस्तेमाल से कुल दूरी करीब 150 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।
कभी लोग मजाक उड़ाते थे, अब सैल्यूट करते हैं
राहुल फिलहाल चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। इलेक्ट्रिकल क्षेत्र की जानकारी ने उन्हें वाहन के ऊर्जा और बैटरी सिस्टम को समझने में मदद की, लेकिन वाहन के मैकेनिकल हिस्से पर काम करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। राहुल के अनुसार मैकेनिकल से जुड़े कुछ कामों में उन्हें परेशानी आई। राहुल बताते हैं कि शुरुआत में उनके इस आइडिया को कॉलेज के कुछ छात्रों और परिवार के लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती दौर में परिवार की नाराजगी भी सामने आई, लेकिन जब वाहन तैयार होकर सड़क पर चलने लगा तो लोगों का नजरिया बदल गया। अब परिवार और आसपास के लोग राहुल के प्रयास से खुश हैं। राहुल अब इसी वाहन का कॉलेज आने-जाने में भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
5 सीटर सोलर कार बनाने का सपना
राहुल के मुताबिक मौजूदा वाहन उन्होंने मुख्य रूप से प्रोटोटाइप और टेस्टिंग के उद्देश्य से तैयार किया है और शुरुआती परीक्षण सफल रहा है। अब वह इससे आगे बढ़कर 5 सीटर सोलर कार बनाने की योजना पर काम करना चाहते हैं। हालांकि इसके लिए मौजूदा प्रोजेक्ट की तुलना में काफी अधिक बजट की जरूरत होगी। राहुल को उम्मीद है कि कॉलेज, किसी संस्था या अन्य स्तर से आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग मिलने पर वह अपने इस प्रोजेक्ट को अगले स्तर तक ले जा सकेंगे।