देवभूमि का वह मेला, जहां शिव के चार भाइयों का होता है मिलन और इंद्रदेव करते हैं बारिश

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Chamoli:  बसंत ऋतु और बैसाख के महीने में देवभूमि उत्तराखंड का कोना कोना मेलों और त्योहारों से गुलजार है। गढ़वाल और कुमाऊं के बीचोंबीच बसे चमोली जिले नारायबगड़ ब्लॉक में इन दिनों पंती मेले और देवाई यात्रा की धूम है। इस ब्लॉक के दर्जनों गावों में भगवान शिव की चार अलग अलग भाइयों के रूपों में पूजा की (devotee participating in Devai yatra Panti Mela Chamoli )जाती है। महादेव के चारों भाइयों का एक जगह मिलन होता है, जिसे देवाई मिलन यात्रा कहा जाता है।

नारायणबगड़ ब्लॉक के पंती गांव में भी देवाई यात्रा हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। यहां के अलग अलग गावों में भगवान शिव को कोबेश्वर महादेव, मृत्युंजय महादेव, मिंगेश्वर महादेव और मालेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है। गावों से महादेव के चारों रूपों की शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दौरान लाटू देवता, भूम्याल देवता, क्षेत्रपाल देवता के निशाण भी फहराए जाते हैं। यह चारों भाई बैसाखी के दिन नारायण बगड़ के पंती में पिंडर नदी में स्नान के लिए आते हैं। स्थानीय लोग भी अपने आराध्य देव के दर्शन करने और उनके मिलन को देखने इस मेले में बड़े उत्सुकता और उत्साह से आते हैं।

उसके पश्चात इन चारों भाइयों के गांव में 2  गते बैसाख से 5 गते बैसाख तक मेले आयोजित होते है। महादेव स्वरूपी चारों भाइयों के मेल मिलाप और उसके पश्चात यहां पर ढोल दमाऊ के साथ पौराणिक लोक नृत्य किया जाता है। सबसे खास बात है कि देवाई यात्रा के दौरान हर हाल में बारिश जरूर होती है। इस बार भी काफी समय से बारिश नही हुई थी। लेकिन गुरुवार को जैसे ही शिव के अलग अलग रूपों का मिलन हुआ तो बारिश के बूंदों ने स्थानीय श्रद्धालुओं को आशार्वाद दिया। स्थानीय निवासी मनबर सिंह नेगी ने बताया कि पिछले दो साल कोरोना के कारण देवाई यात्रा नहीं हो सकी थी। लेकिन कोरोना काल के बाद पारंपरिक मेलों की रौनक लौटी है। देवाई यात्रा में भी इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में भी उत्साह है।

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