शुद्धिकरण मामला, राहुल गांधी पर FIR, भड़के कांग्रेसी, हल्द्वानी कोतवाली में हंगामा, देहरादून में भी प्रदर्शन
DEHRADUN/HALDWANI: हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के शुद्धिकरण का मामला दिनोंदिन तूल पकड़ता जा रहा है। दिल्ली में राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस मामले में एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी, उल्टा राहुल गांधी के खिलाफ ही हल्द्वानी में SC-ST का केस दर्ज कर दिया। इस एफआईआर से कांग्रेस में उबाल आ गया है। हल्द्वानी से लेकर देहरादून तक कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया।
बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को दलितों का अपमान बताते हुए छुआछूत करार दिया था और दोषियों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन इस मामले में रविवार को कोतवाली हल्द्वानी में उल्टा राहुल गांधी के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में राहुल पर एससी/एसटी एक्ट धारा लगाई गई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए सफाई और धार्मिक अनुष्ठान को लेकर गलत टिप्पणी की थी।

इस एफआआईर ने उत्तराखंड कांग्रेस का पारा चढ़ा दिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेसी कोतवाली पहुंचे और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे को झूठा, निराधार और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। यशपाल आर्य का आरोप है कि इस मामले में कांग्रेस की ओर से 18 अगस्त को ही शिकायत कर दी गई थी, बावजूद इसके अब तक दोषियों पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, जबकि राहुल गांधी के खिलाफ फौरन केस दर्ज कर दिया जाता है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और हल्द्वानी कोतवाल के बीच गहमागहमी भी हो गई।
उधर देहरादून में भी राहुल गांधी पर एफआईआर के विरोध में कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया। सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसियों ने डीजीपी कार्यालय तक मार्च किया और डीजीपी को ज्ञापन सौंपा और एफआईआर तत्काल निरस्त करने की मांग की।

विकासनगर कोतवाली में भी प्रीतम सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रीतम सिंह ने कहा कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ उन्होंने तहरीर सौंपते हुए दोषियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद दोषियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई न होना प्रशासन की निष्पक्षता और प्रदेश सरकार की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।