गर्व का पल:  गरीबी झेली, प्राइवेट नौकरी की, अब सेना में अफसर बना पहाड़ का बेटा अभिषेक सजवाण

Share this news

TEHRI:  मन में वर्दी की चाह हो, सच्ची लगन हो तो कोई मुश्किल आडे नहीं आती। लेकिन सेना की वर्दी का हर किसी का सपना कहां पूरा होता है। इसके लिए चाहिए होता है जुनून औऱ जीतोड़ मेहनत। टिहरी के चंबा के रहने वाले अभिषेक सजवाण ऐसे युवाओँ में से एक हैं जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बाद भी हार नहीं मानी और आज ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से पासआउट होकर सेना में अफसर बने हैं। अभिषेक की सफलता से पूरा पहाड़ गौरवान्वित है।

अभिषेक सजवाण चंबा ब्लॉक के कोट गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसानी का काम करते हैं जबकि मां आंगनवाड़ी कार्यकत्री हैं। अभिषेक को सेना में जाने का शौक था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की, लेकिन सफलता हाथ नही लगी। इसके बावजूद भी उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा। अभिषेक के मामा गढ़वाल राइफल्स से रिटायर हुए हैं । अपने मामा से अभिषेक हमेशा सेना में जाने को प्रेरित होते रहे। बार बार रिजेक्शन के बाद भी अभिषेक ने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। अभिषेक की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई श्रीदेव सुमन राजकीय इंटर कॉलेज चंबा से हुई। ये सेना के प्रति अभिषेक का लगाव ही था कि उन्होंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए डिफेंस एंड स्ट्रेटिजी विषय को चुना। बीच में घर चलाने के लिए अभिषेक को एक निजी मॉल में नौकरी भी करनी पड़ी।

आर्मी के प्रति पैशन को देखते हुए अभिषेक ने एनसीसी में अपनी मेहनत से सीनियर अंडर ऑफिसर का पद पाया। एनसीसी में उनके अनुभव को देखते हुए अभिषेक को आर्मर्ड रेजिमेंट में अटैच किया गया और नेशनल इंटिग्रेशन कैंप के लिए चयनित किया गया। यहीं से अभिषेक के लिए रास्ता तैयार हुआ। एनसीसी में रहने दौरान उन्होंने स्पेशल एंट्री स्कीम का एग्जाम पास किया और देशभर में 51वीं रैंक के साथ ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में जगह पाई। कड़ी ट्रेनिंग के बाद 6 सितंबर को ओटीए से पासआउट होते ही अभिषेक सेना में अफसर बन गए।

होनहार अभिषेक को माउंटेनियरिंग, कयाकिंग और रनिंग का शौक रहा है। उन्होंने 100 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन भी पूरी की है। अभिषेक की सफलता की कहानी पूरे पहाड़ के लिए गर्व की बात है।

 

अल्मोड़ा का पवन पर सेना में अफसर

अल्मोड़ा के भतरौंजखान के दढूली गाँव के रहने वाले पवन उफाध्याय भी ओटीएस से पासआउट होकरसेना में अफसर बने हैं। पवन का परिवार फिलहाल गाजियाबाद में रहता है। उन्हें भारतीय सेना की पंजाब रेजीमेंट की 22वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशन मिला है। पवन की उपलब्धि के पीछे माता-पिता का त्याग और परिश्रम भी अहम रहा

 

(Visited 2,491 times, 1 visits today)

You Might Be Interested In