30 साल बाद रामपुर तिराहा कांड के जख्मों पर मरहम, 2 दोषी पीएसी जवानों को उम्रकैद की सजा

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MUZAFFARNAGAR: 2 अक्टूबर 1994 की काली रात को हुए रामपुर तिराहा कांड के जख्मों पर थोड़ा सा ही सही, मरहम लगा है। 30  साल बाद मुजफ्फरनगर की स्पेशल कोर्ट ने पीएसी के दो सिपाहियों पर दोष सिद्ध करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।

बता दें कि अगल राज्य की मांग को लेकर पहाड़ के लोग 30 साल पहले आंदोलन के लिए दिल्ली जा रहे थे। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर दिल्ली जा रहे महिला और पुरूष आंदोलनकारियों को पुलिस ने जबरन रोका और उनके साथ बर्बरता की गई। युवाओं को गोलियों से छलनी किया गया। महिलाओं से बलात्कार किया गया। इस फायरिंग में 7 आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जनभर से ज्यादा महिलाओं के साथ दुष्कर्म व छेड़छाड़ की घटनाएं हुई थी।

मुजफ्फरनगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सामूहिक दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और साजिश रचने के मामले में सुनवाई करते हुए पीएसी के दो जवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषियों पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

सीबीआई की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। दोनों अभियुक्तों पर अभियुक्त मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप सिंह पर धारा 376जी, 323, 354, 392, 509 व 120 बी में दोष सिद्ध हुआ था। दोषियों को धारा 376 (2) (जी) में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।  दोष सिद्ध हुआ था। धारा 392 में सात साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 354 में दो साल का कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 509 में एक साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।  दोनों दोषियों पर कुल अर्थदंड एक लाख रुपये लगाया गया है। अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि बतौर प्रतिकर पीड़िताओं को दी जाएगी।

ये आंदोलनकारी हुए थे शहीद

देहरादून नेहरु कालोनी निवासी रविंद्र रावत उर्फ गोलू

भालावाला निवासी सतेंद्र चौहान

बदरीपुर निवासी गिरीश भदरी

अजबपुर निवासी राजेश लखेड़ा

ऋषिकेश निवासी सूर्यप्रकाश थपलियाल

ऊखीमठ निवासी अशोक कुमार

भानियावाला निवासी राजेश नेगी

रामपुर तिराहा कांड में यूपी और उत्तराखंड में 54 मुकदमों में लंबी विवेचना के बाद 30 मुकदमों में चार्जशीट दाखिल हुई। ज्यादातर मुकदमे उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल और यूपी के मुरादाबाद में चले जबकि सात मामलों को लेकर मुजफ्फरनगर में सुनवाई हुई

 

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