आखिर क्यों हुआ कर्नल का आम आदमी पार्टी से मोहभंग? हाशिए पर धेकेले जाने से नाराज थे कर्नल?
DEHRADUN: उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सीएम उम्मीदवार रहे कर्नल अजय कोठियाल ने पार्टी का सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कर्नल कोठियाल ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की प्रति साझा करके जानकारी दी है। (Col Ajay kothiyal parts away from aam admi party, was annoyed being sidelined in party) लेकिन आखिर ऐसी क्या बात हो गई कि आम आदमी पार्टी का दामन थामनेके बाद एक साल के भीतर ही कर्नल कोठियाल को पार्टी छोड़नी पड़ गई?
उत्तराखंड में भी ये चर्चाएं हैं कि आखिर जिस व्यक्ति पर विश्वास जताकर अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था, उसे एक साल में ही पार्टी से रुखसत होना पड़ा? चलिए उन कारणों को तलाशने की कोशिश करते हैं।
1.विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की बुरी तरह हार हुई। कर्नल कोठियाल गंगोत्री से चुनाव लड़े,लेकिन अपनी जमानत भी नहीं बता पाए। इसलिए नैतिकता के आधार पर भी कर्नल पर एक दबाव सा बनने लगा था।
2.चुनाव बीतने के बाद कर्नल पार्टी में हाशिए पर धकेल दिए गए। दिल्ली और देहरादून के बीच संपर्क लगातार कम होता गया। दिल्ली के नेता जिस तरह उत्तराखंड आगमन पर पहले कर्नल से मुलाकात जरूर करते थे, अब दिल्ली के नेता इससे भी कन्नी काटने लगे। कर्नल पार्टी में इस तरह अलग थलग होने लगे थे
3.चुनावी नतीजों के बाद आम आदमी पार्टी की कार्यकारिणी भंग कर दी गई और हाल के दिनों में नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। लेकिन दिल्ली की टीम ने न तो कार्यकारिणी भंग करते वक्त कर्नल की राय ली, और न ही नई कार्यकारिणी के गठन के वक्त कर्नल कोठियाल से पूछा गया। पार्टी के फैसलों में भी कर्नल से कोई चर्चा नहीं की जाती थी। जोत सिंह बिष्ट के आप ज्वाइन करते वक्त भी कोठियाल से पूचा तक नहीं गया। कर्नल कोठियाल को ये उपेक्षा रास नहीं आई।
4.सोशल मीडिया कैंपेन में मास्टर रही आम आदमी पार्टी ने चुनाव के वक्त कर्नलका चेहरा खूब भुनाया था। लेकिन हार के बाद कर्नल कोठियाल सोशल मीडिया के पोस्टरों से गायब होते गए। उनको बड़े नेताओं का कार्यक्रमों से बाहर रखा गया। होर्डिंग, पोस्टरों से भी कर्नल का चेहरा गायब कर दिया गया। कर्नल के समर्थकों को ये बात भी रास नहीं आई।
5.एक कारण ये भी माना जा रहा है कि चुनाव के वक्त और चुनाव के बाद पार्टी में उत्तराखंड मूल के व्यक्तियों की उपेक्षा हुई। कई पदाधिकारियों ने इसी आरोप के चलते पार्टी छोड़ दी। कर्नल को भी ये महसूस होने लगा था कि पहाड़ी राज्य में पैर जमाना चाह रही पार्टी पहाड़ी लोगों को तरजीह नहीं दे रही है। ये भी एक वजह रही कि कर्नल का आम आदमी पार्टी से मोहभंग होने लगा।
