हाईकमान की नाराजगी को नजरअंदाज कर कुमाऊं यात्रा पर हरीश रावत, प्रीतम को भी लिया साथ, बगावत की आहट?
DEHRADUN: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के दिल में क्या है, उका अगला कदम क्या हो सकता है, ये सियासी पंडित तो क्या उके राजनीतिक करीबी भी नहीं समझ पाते। एक तरफ पार्टी हाईकमान से हरीश रावत को आदेश आता है कि फौरन यात्रा को रोक दो, दूसरी तरफ हरीश रावत काशीपुर, जसपुर होते हुए हल्द्वानी में धन्यवाद यात्रा की बुलंदी से अगुआई करते नजर आते हैं। जले पर नमक छिड़कने के लिए हरीश रावत ने उत्तराखंड चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह को भी यात्रा में शामिल करके हाईकमान को ये संदेश दे दिया कि शेर बूढ़ा जरूर हुआ है, लेकिन शिकार करना नहीं भूला है।
बता दें कि बीमारी से उबरने के बाद पिछले दिनों हरीश रावत उत्तराखंड लौटे थे और अचानक सक्रिय हो गए थे। इससे पहले हरीश रावत को एक तरह से हाशिए पर कर दिय गया था। लेकिन हरदा की एक्टिव राजनीति ने फिर से कांग्रेस में अंदरूनी उबाल ला दिया। हरीश रावत मंगलौर पहुंचे औऱ वहां बदलाव लाने का नारा बुलंद करन लगे। ये बात वर्तमान विधायक काजी निजामुद्दीन को नागवार गुजरी और वो इसकी शिकायत करने दिल्ली पहुंच गए। बस फिर क्या था, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने हरदा के दौरों पर नाराजगी जता दी। पार्टी प्रभारी कुमारी शैलजा ने चिट्ठी तक भेज दी कि उलूल जलूल बयान मत दो और पार्टी हित में फौरन अपनी यात्रा रोक दो।

लेकिन लगता है हरदा पर इसका कोई असर नहीं हुआ। हरीश रावत धन्यवाद यात्रा लेकर पहले जसपुर पहुंचे, फिर काशीपुर पहुंचे और अब हल्द्वानी जा रहे हैं। उसे मिलने समर्थकों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है। हरदा इस खेमे में अकेले न पड़ें, इसके लिए उन्होंने जसपुर में प्रीतम सिंह को भी अपने साथ शामिल कर लिया। एक समय पर प्रीतम सिंह औऱ हरीश रावत के बीच दूरियां थी, लेकिन अब ये नजदीकियां कांग्रेस में घमासान के संकेत दे रहे हैं।

हाईकमान को किस बात का डर?
कांग्रेस हाईकमान को डर है कि कहीं हरीश रावत की अति सक्रियता पार्टी की योजनाओं और रणनीति पर पानी न फेर दें। साल 2022 के चुनावों से पहले कांग्रेस धरातल पर मजबूत दिख रही थी। लेकिन फिर हरदा के पैंतरों ने टिकट वितरण में वीटो लगा दिया, नतीजा कांग्रेस 19 सीटों पर समिट कर रह गई। हरीश रावत अपना चुनाव भी हार गए। इस बार हाईकमान ने ऐसी स्थिति से बचन के लिए इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी की कमान हरक सिंह रावत और कैंपेन कमेटी की कमान प्रीतम सिंह को सौंप कर शक्ति संतुलन बनाने के प्रयास किए और हरीश रावत को हाशिए पर कर दिया। लेकिन हरीश रावत का प्रदेश अध्यक्ष को जानकारी दिए बिना यात्रा निकालना पार्टी की गुटबाजी को हवा दे रहा है। शायद यही वजह है कि हाईकमान को हरदा को फटकार तक लगानी पड़ी और यात्रा रोकने के लिए कहना पड़ा। इसके बावजूद हरीश रावत रुकने के मूड में नहीं हैं। वे साफ कर चुके हैं कि चुनौतियां भले ही बड़ी हैं, लेकिन अब रुकना नहीं है