कलयुगी मां ने किया नाबालिग बेटी का सौदा, पैसे नहीं मिले तो बेटी के अपहरण का झूठा मुकदमा दर्ज कराया
DEHRADUN: राजधानी देहरादून से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही एक कलयुगी मां ने अपनी ही 15 वर्षीय नाबालिग बेटी का डेढ़ लाख रुपये में सौदा कर दिया। जब सौदे की पूरी रकम नहीं मिली तो उसने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी और पुलिस में मुकदमा दर्ज करा दिया। राजपुर थाना पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए नाबालिग को सकुशल बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि 5 जुलाई को सहस्त्रधारा रोड, देहरादून की रहने वाली नीलम देवी ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के अपहरण का शिकायती पत्र थाना राजपुर में दिया था, जिस पर पुलिस ने धारा 137(2) BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
एसएसपी के निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम ने जब सर्विलांस व सीसीटीवी खंगाले, तो पीड़िता की लोकेशन मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) मिली। पुलिस टीम ने गोपनीय रूप से दबिश देकर मुजफ्फरनगर से मनीष और लवी कुमार को गिरफ्तार किया और उनके पास से अपहृत नाबालिग को सकुशल छुड़ाया।
पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। आरोपी मां नीलम देवी की मुलाकात देहरादून के एक समारोह में पिंकी मलिक से हुई थी। आर्थिक तंगी का हवाला देकर नीलम देवी ने अपनी बेटी को डेढ़ लाख रुपये में बेचने का सौदा किया। पिंकी मलिक ने लड़की को लवी कुमार को सौंपा, जिसने आगे ₹2 लाख में मनीष (37 वर्ष) को विवाह के इरादे से बेच दिया।
₹80 हजार मिले, बाकी न मिलने पर रची साजिश:
पूछताछ में आरोपी मां ने कबूल किया कि उसे सौदे की पूरी रकम नहीं मिली थी। उसे केवल 80 हजार रुपये मिले थे। बाकी पैसे नहीं मिलने पर उसने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में मुकदमा दर्ज करा दिया, ताकि दबाव बनाकर बाकी रकम हासिल की जा सके।
पुलिस ने मामले में मनीष, लवी कुमार, पिंकी मलिक और नाबालिग की मां को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अलग अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस पूरे मानव तस्करी नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमे में बीएनएस (BNS) की धारा 64, 3(5), 65(1), 87, 143 तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 5(L)/6, 16/17 की बढ़ोतरी की है।