शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अदालत ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक
UTTAR PRADESH: बटुकों के यौन शोषण के आरोपों पर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है। फैसला आते ही वाराणसी स्थित मठ में उनके अनुयायी खुशियां मनाने लगे। शंकराचार्य पर पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है जिसके खिलाफ उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा कि शंकराचार्य नाम की संस्था को बदनाम करने के लिए साजिश रची गई थी। न्यायालय ने आदेश के बाद इन सब चीजों को खत्म कर दिया है। सांच को आंच नहीं होती, झूठ की ताकत होती है, लेकिन सच की उससे ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि जो भी बातें जनता के बीच में खड़े होकर कहीं गई हैं, आज उन बातों की पोल खुल गई है, कलई खुल चुकी है। शंकराचार्य ने कहा कि जिस व्यक्ति ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है वो पहले से ही हिस्ट्रीशीटर है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने जो कुछ भी कहा है या जो भी किया है, वह देखा जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। शंकराचार्य के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता कोई अता-पता ही नहीं है। सरकार के वकील ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है।
शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है।
शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जिन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है और बटुकों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार के वकील ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है।
क्या था मामला
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में केस दर्ज किया गया। यह आदेश पॉक्सो कोर्ट के पॉक्सो कोर्ट के अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने आदेश में पुलिस से कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के तहत निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करें। साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों की पहचान और सम्मान की सुरक्षा करने का भी आदेश दिया है।
मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ था विवाद
इसी साल 18 जनवरी को माघ मेले में ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन के साथ विवाद हो गया था। पालकी पर स्नान करने के लिए जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों को प्रशासन ने भीड़ अधिक होने और भगदड़ की आशंका पर घाट से पहले ही रोक दिया। शंकाराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बटुकों को चोटी पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की। साथ ही साथ शंकराचार्य और उनके शिष्यों का भी अपमान किया। इसके विरोध में शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए जहां पर उन्हें पुलिस वाले छोड़कर गए थे। 11 दिन तक धरना चला। शंकराचार्य की मांग थी कि अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें तो वह अपने टेक समाप्त कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहने पर भी जब को हल नहीं निकला तब शंकराचार्य ने 28 जनवरी को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए।
