विधानसभा की कार्यशैली में बदलाव जरूरी: रमेश भट्ट

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उत्तराखंड ने विधानसभा अध्यक्ष के पद पर पहली महिला स्पीकर को नियुक्त कर इतिहास रचा है। दो बार की विधायक ऋतु भूषण खंडूड़ी जी को इस उच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के लिए हार्दिक बधाई एंव शुभकामनाएं। मैंने अपने पत्रकारिता के कार्यकाल में सबसे ज्यादा वक्त संसद को कवर करने में गुजारा है। संसदीय प्रक्रियाओं और कामकाज के प्रति दिलचस्पी के आधार पर मैं आपसे कुछ निवेदन कर रहा हूं।

  1. संसदीय ज्ञाताओं ने हमेशा इस बात की चिंता की है, कि सदन का कामकाज साल में कम से कम 100 दिन चलना चाहिए। क्योंकि सदन के माध्यम से ही विधायक अपने क्षेत्र की समस्याएं रख सकते हैं। सरकार और शासन को जवाबदेह बना सकते हैं। मगर उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में ये तस्वीर बिल्कुल अलग है। 2017 से 2021 तक पांच सालों में सदन की कार्यवाही पर नजर डालें तो केवल 73 दिन सदन की कार्यवाही चल सकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और जनप्रतिनिधि सदन की कार्यवाही को कितनी गंभीरता से लेते हैं। सच कहूं तो ये आंकड़े संसदीय प्रक्रिया को मुंह चिढ़ाते हैं। इस तस्वीर को बदलने की जरूरत है।
  2. सदन की कार्यवाही में प्रश्नकाल का सबसे ज्यादा महत्व है। जाहिर है सत्र लंबा होगा तो विधायकों को अपने क्षेत्र से जुड़े ज्यादा सवाल पूछने और मुद्दे उठाने के मौके मिलेंगे। इससे शासन और सरकार की जवाबदेही भी तय होगी। साथ ही कई बार ये देखने में आया है कि मंत्री प्रश्नकाल में तैयारी के साथ नहीं आते। मुझे पूरी आशा है कि 2022 में ये तस्वीर बदलेगी। कई बार मंत्री विधायकों पर प्रश्न न पूछने का दबाव डालते हैं, जो कि संसदीय प्रक्रिया के खिलाफ है। इस पर आप रोक लगाएंगी।
  3. विधानसभा में तीन सत्र होते हैं। बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र। इसमें सबसे प्रमुख है बजट सत्र। बजट सत्र के दौरान न सिर्फ बजट पर अच्छी चर्चा हो, बल्कि ज्यादातर विभागों की कार्ययोजना पर भी विस्तार से बातचीत हो। आप थोड़ी सी कोशिश करेंगी, तो आउटकम बजट पर भी सदन में तथ्य परख चर्चा कराई जा सकती है।
  4. विधानसभा में 17 कमेटियां हैं। इन समितियों को न सिर्फ मजबूत किया जाए बल्कि इनके द्वारा दी गई सिफारिशों पर सरकार गंभीरता से विचार करे।
  5. विधानसभा में एक डिजिटल लाइब्रेरी बने जिसका फायदा विधायकों के साथ साथ संसदीय कार्यों में रुचि रखने वालों को मिलता रहे।
  6. विधायकों को विषयवार अच्छा कंटेंट मिल सके, इसके लिए विधानसभा में रिसर्च विंग बनाई जाए। ये विंग तभी कामयाब होगी जब सारे विभाग इसे समय से शोधपरख जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इससे विधानसभा में होने वाली चर्चा का स्तर में बडा सुधार आएगा।
  7. विधानसभा अपना खुद का डिजीटल चैनल शुरू करे, जिसमें विधानसभा की कार्यवाही के साथ विधायी कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर चर्चा हो। जिन विधायकों को सदन में समय नहीं मिल पाता, उनके लिए ये चैनल सशक्त माध्यम बने। इससे न सिर्फ विधायक जवाबदेह बनेंगे बल्कि जनता को भी अपने विधायकों को करीब से सुनने का मौका मिलेगा।
  8. आखिर में मैं चाहता हूं, चूंकि सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है, इसलिए एक लंबा सत्र हर साल गैरसैंण में जरूर होना चाहिए।

मैं प्रार्थना करता हूं कि आपका ये कार्यकाल ऐतिहासिक हो और उत्तराखंड के विकास में रचनात्मक भूमिका निभाए।

                                                                       रमेश भट्ट

                                                                      देवभूमि डायलॉग

 

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