पहाड़ की पिरूल गर्ल, जिनकी बनाई राखियों की अमेरिका में भी है डिमांड

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ALMORA:  पहाड़ की बेटियों में हुनर कूट कूट कर भरा है। जो पिरूल हमारे जंगलो के लिए अभिशाप बना रहता है, कुछ हुनरमंद लोगों ने उसे अफनी मेहनत से वरदान में बदल दिया है। अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक में मानिला गांव की गीता पंत भी पिरूल को वरदान बनाने में जुटी हैं। गीता पिरूल से बालों के जूड़े के क्लिप, तरह तरह की टोकरियां, फ्लावर पॉट, पेन स्टैंड, कान के झुमके, टी कॉस्टर, वॉल हैंगिंग जैसे दर्जनों डेकोरेटिव आइटम बना रही हैं। यही नहीं रक्षाबंधन के मौके पर गीता पिरूल से शानदार राखियां बनाती हैं जिनकी विदेशों में भी डिमांड रहती है।

सल्ट ब्लाक निवासी गीता पंत लाल बहादुर शास्त्री संस्थान हल्दूचौड़ से बीएड कर चुकी हैं। लेकिन खास बात ये है कि उन्होंने शहरों का रुख करने के बजाए गावों में रहकर ही स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाए। गीता बताती हैं कि   पिरूल जैसे वेस्ट मटीरियल का सदुपयोग कैसे हो इसके कई वीडियो देखे जिससे उनका इंटरेस्ट बढ़ता गया। गीता ने अल्मोड़ा की ही मंजू आर शाह से संपर्क किया जो पिरूल के क्षेत्र में शानदार काम कर रही हैं। उनसे शुरुआती ट्रेनिंग लेने के बाद गीता खुद ही इस दिशा में आगे बढ़ने लगी और अपनी कला को निखारने लगी।

गीता द्वारा पिरूल से तैयार किचन और ड्रॉइंग रूम के सजावटी आइटम की जबरदस्त डिमांड बढ़ रही है। गीता बताती हैं कि पिछले 2 साल में रक्षाबंधन पर पिरूल की राखियों की बहुचत डिमांड आ रही है। पिरूल की राखियों को उत्तराखंड और अन्य राज्यों के साथ साथ विदेशों में रहने वाले भी पसंद कर रहे हैं। गीता कहती हैं, पिछले साल उन्हें अमेरिका से पिरूल की राखियों की डिमांड आई। जिससे उन्होंने अच्छी खासी आमदनी की है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के साथ ही गाजियाबाद, दिल्ली, देहरादून, नोएडा, फरीदाबाद से भी पिरूल की राखियों की डिमांड आती रहती है।

गीता कहती हैं कि अब वो हूप आर्ट भी तैयार कर रही हैं। इस आर्ट को लकड़ी पर धागों के साथ तैयार किया जाता है। गीता का कहना है कि पिरूल जैसे वेस्ट मटीरियल को बेस्ट बनाने की इस मुहिम में और भी लड़कियों को साथ जोड़ना चाहती हैं। जिससे कि गांव में रहने वाली लड़कियां आत्मनिर्भर हो सकें।

 

 

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