गैस की किल्लत का उत्तराखंड में भी दिखने लगा असर, ढाबे बंद, विधानसभा में भी गूंजा मामला
DEHRADUN: अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में बिगड़े हालात का सबसे ज्यादा असर तेल और गैस का आपूर्ति पर पड़ रहा है। भारत में एलपीजी सिलेंडर को लेकर अफरा तफरी का माहौल है। उत्तराखंड में भी एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के चलते कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है जबकि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी नही हो पा रही है। यह मामला आज बजट सत्र के दौरान विधानसभा में भी उठा, लेकिन सरकार ने केंद्रीय विषय का हवाला देते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया।
मध्य पूर्व एशिया में संघर्ष की वजह से गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। देहरादून, मसूरी और नैनीताल जैसे प्रमुख शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है।देहरादून में कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से ढाबों पर ताले लटकने लगे हैं। हालांकि कमर्शियल सिलेंडर पर पाबंदी इसलिए लगाई गई है कि घरेलू गैल की सप्लाई बाधित न हो, लेकिन अब ऑनलाइन बुकिंग बंद होने से लोगों में कई तरह की शंकाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग मजबूर होकर सीधे गैस एजेंसियों और गोदामों का रुख कर रहे हैं। इससे वहां भीड़ बढ़ती जा रही है और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार को देहरादून हरिद्वार, रुद्रपुर समेत शहरों में गैस गोदामों और एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें देखी गईं।
एलपीजी संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने आवश्यक वस्तुओं और सप्लाई चेन पर पैनी नजर रखने के लिए तत्काल अफसर और विशेषज्ञों की टीम की नियुक्ति की है, ताकि किसी भी संभावित संकट से निपटा जा सके। सरकारी आदेश के अनुसार, इन अधिकारियों और विशेषज्ञों का मुख्य काम प्रदेश भर में खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता की निरंतर निगरानी करना होगा। यह टीम न केवल सप्लाई चेन और वितरण नेटवर्क पर पैनी नजर रखेगी, बल्कि खाद्य एवं रसद से जुड़ी जानकारियों का नियमित विश्लेषण भी करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि राज्य सरकार आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने निर्देश दिए हैं कि यदि गैस का संकट और गहराता है, तो व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक ईंधन के तौर पर ‘लकड़ी’ उपलब्ध कराई जाएगी।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा
संच टाइम के बाद जैसे ही सदन शुरू हुआ विपक्ष के सदस्यों ने एक सुर में एलपीजी की किल्लत पर चर्चा की मांग की। स्पीकर ने इस प्रस्ताव पर सहमति भी दे दी, लेकिन संसदीय कार्यमंत्री एक ही बात कहते रहे कि ये केंद्र सरकार का विषय है इस पर राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती। इस पर विपक्ष के ददस्यों ने सरकार पर पीठ की अवमानना का आरोप लगाया औऱ जमकर हंगामा किया।
