प्रशासन ने शुरू की धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट की जमीन की जांच ,CM ने दिए थे जांच के आदेश
DEHRADUN: देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में शेख उल हिंद एजुकेशनल ट्रस्ट को दी गई 20 एकड़ जमीन के मामले में सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। जिसके बाद प्रशासन की टीम ने जमीन की जांच शुरू कर दी है। इस जमीन को मौलाना असद महमूद मदनी के ट्रस्ट को शिक्षण संस्थान या बडा मदरसा खोलने के मकसद से दिया गया था। लेकिन हाल ही में इस जमीन पर अवैध तरीके से प्लॉटिंग हो गई थी। इस पूरे मामले ने राज्य का सियासी पारा भी चढ़ा दिया है।
बुधवार को एडीएम के नेतृत्व में एसडीएम और राजस्व अधिकारियों समेत प्रशासन की एक बड़ी टीम धौलास पहुंची और विवादित जमीन की पैमाइश शुरू की। प्रशासन की टीम ने ये भी जानने की कोशिश की कि क्या ट्रस्ट के नाम पर वन भूमि पर तो कब्जा नहीं किया गया है। प्रशासन की टीम ने नपाई के बाद जमीन के चारों तरफ लाल झंडे लगाए हैं यानी कि अब इस जमीन पर अब ट्रस्ट या किसी और के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके बाजद राजस्व अभिलेखों की भी जांच की जाएगी और अगर ये लगेगा कि कृषि भूमि को प्लॉटिंग करके बेचा गया और नियों की अनदेखी हुई तो संबंधित लोगों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है और उसके बाद इस पूरी जमीन को सरकार में निहित भी किया जा सकता है
जिलाधिकारी सविन बंसल ने त्वरित एक्शन लेते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा के नेतृत्व में प्रशासन की संयुक्त टीम का गठन किया और ग्राम धौलास में संबंधित भूमि का स्थलीय निरीक्षण एवं पैमाइश कराई गई। अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा ने कहा कि शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को पूर्व में शैक्षणिक प्रयोजनों हेतु भूमि आवंटित की गई थी। वर्तमान में यह जांच की जा रही है कि आवंटन के समय निर्धारित शर्तों एवं उद्देश्यों का अनुपालन किया गया है अथवा नहीं तथा भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है। इस संबंध में तहसील प्रशासन, वन विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत पैमाइश एवं जांच की कार्रवाई की जा रही है।</p>
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि ट्रस्ट द्वारा लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि का विक्रय 15 व्यक्तियों को बड़े भूखंडों के रूप में किया गया। तत्पश्चात इन व्यक्तियों द्वारा उक्त भूमि को 70-80 अन्य व्यक्तियों को छोटे-छोटे भूखंडों में विक्रय किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट को पूर्व में भूमि विक्रय की अनुमति इस शर्त पर प्रदान की गई थी कि संबंधित भूमि का स्वरूप कृषि भूमि ही रहेगा तथा उसे अकृषि घोषित कर विक्रय नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिर से दोहराया है कि अगर कोई गड़बड़ सामने आती है तो जमीन को सरकार में निहित किया जाएगा। सीएम ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति को ही प्राथमिकता दी है, बार-बार डेमोग्राफिक बदलाव और मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बात आना कहीं न कहीं एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है, धौलास में किया गया भूमि आवंटन इसका एक बड़ा उदाहरण है। इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि भूमि का आवंटन नियमों के विरुद्ध किया गया है, तो उक्त भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जाएगा।
क्या था मामला
साल 2004 में मौलाना महमूद असद मदनी ने तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी के सामने सहसपुर क्षेत्र में बड़ा मदरसा या शिक्षण संस्थान स्थापित करन का प्रस्ताव रखा, जिस पर सरकार ने सहमति व्यक्त की और मदनी के ट्रस्ट शेख उल हिंद को धौलास क्षेत्र में 20 एकड़ जमीन आवंटित की गई। आईएमए ने सुरक्ष कारणों का हवाला देकर इस जमीन पर किसी तरह की कमर्शियल एक्टिविटी पर सख्त एतराज जताया जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी साफ किया कि जमीन का लैंड यूज नहीं बदला जा सकता। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस जमीन पर धड़ल्ले से प्लॉटिंग की जा रही है। ऐसे भी आरोप हैं कि इस जमीन पर रूप से समुदाय विशेष के लोगों को बसाने कीसाजिश रची जा रही है जिससे डेमोग्राफी में बदलाव आ सके।
