बदरीनाथ डीजे कॉन्सर्ट विवाद पर बोले मंत्री सतपाल महाराज ‘शंख में होती है जानवर की हड्डी’, भड़की चारधाम महापंचायत
DEHRADUN: बद्रीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। धर्मस्व और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के एक अजीब बयान ने इस आग में घी का काम किया है। महाराज ने कहा कि शंख में भी जानवरों की हड्डी का प्रयोग होता है। इस बयान पर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत में आक्रोश है।
बीती 19-20 सितंबर को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा पर हुए ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026’ डीजे और तेज आवाज के कार्यक्रम पर विवाद बढञ गया है। कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद बद्रीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा को लेकर तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। जिला प्रशासन ने इसकी ठीकरा सेना पर फोड़ दिया था, जबकि स्वयं डीएम चमोली ने इस कार्यक्रम के लिए नोडल अफसर की तैनाती की थी।
आरोप है कि बद्रीनाथ जैसे पावन धाम में तेज साउंड, डीजे और डांस वाला कार्यक्रम आयोजित करना, वहां की परंपराओं के अनुरूप नहीं है। तमाम राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम जनता ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। इसी बीच अब इस पूरे मामले में उत्तराखंड के संस्कृति-धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। सतपाल महाराज ने बदरीनाथ ने कहा कि बद्रीनाथ में संगीत कोई नई बात नहीं है। सतपाल महाराज ने कहा कि, ‘नारायण पर्वत पर भगवान बदरी विशाल का मंदिर है। लेकिन वहां मिलिट्री बैंड की धुनें अक्सर कपाट खुलने या बंद होने पर सुनाई देती हैं इसलिए संगीत को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं माना जा सकता।
महाराज ने आगे कहा कि यह कहना सही नहीं है कि बदरीनाथ में शंख नहीं बजता। मंदिर के अंदर पूजा के दौरान शंख का इस्तेमाल नहीं किया जाता, लेकिन बाहर शंख बजाया जाता है। ऐसा इसलिए कि शंख एक जानवर की हड्डी है, हड्डी का प्रयोग पूजा के अंदर नहीं किया जाता। लेकिन शंखध्वनि होती है। भघवान कृष्ण ने बी पांचजन्य शंख बजाया था। भगवान विष्णु के हाथ में भी शंख होता है। इसलिए ये कहना कि बद्रीनाथ में शंख नहीं बजता ये सही नहीं है।
महाराज के इसी बयान को लेकर अब चारधाम महापंचायत ने सवाल खड़े किए हैं। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने कहा कि सतपाल महाराज का यह कहना कि शंख जानवरों की हड्डी से बना होता है, बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद महाराज को उम्र के इस पड़ाव में यह ‘दिव्य ज्ञान’ प्राप्त हुआ है। बृजेश सती ने आरोप लगाया कि ‘बदरीनाथ में हुए विवाद से लोगों का ध्यान हटाने के लिए शंख को लेकर इस तरह का बयान दिया गया है।