बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की होगी कवायद, सीएम धामी ने दी विलोपित घोषणा को पुनर्जीवित करने की मंजूरी

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NAINITAL:  लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिंदुखत्ता के लोगों के लिए अच्छी खबर है। बिंदुखत्ता  को राजस्व ग्राम बनाने के लिए सरकार अब फिर से कवायद शुरू करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लालकुआं क्षेत्र के विधायक डा मोहन सिंह बिष्ट के अनुरोध पर बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की पूर्व में विलोपित की गई घोषणा को पुनर्जीवित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।

मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की घोषणा की थी। राजस्व विभाग ने बिंदुखत्ता के वन क्षेत्र में होने के कारण भूमि हस्तांतरण में लंबा समय लगने की संभावना व्यक्त करते हुए इस घोषणा को विभाग की सूची से विलोपित करने का मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया था। बाद में इस घोषणा को विलोपित भी कर दिया गया। अब मुख्यमंत्री ने राजस्व ग्राम संबंधी घोषणा को पुनर्जीवित किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया है। इससे उम्मीद जगी है कि अब बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के लिए वन भूमि हस्तांतरण समेत अन्य प्रक्रियाएं तेजी से शुरू होंगी।+

इससे पहले बिंदुखत्ता के लोगों को उम्मीद थी कि कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी, लेकिन कैबिनेट में इसका जिक्र न होने पर लोगों में निराशा थी। अब मुख्यमंत्री ने एक बार फिर लोगों की उम्मीदों को बल दिया है।

बतादें कि नैनीताल जनपद के लालकुआं कस्बे से सटे बिंदुखत्ता की आबादी 1 लाख से अधिक है और क्षेत्रफल लगभग 3472 हेक्टेयर है। चंद राजाओं के समय से यह क्षेत्र पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए चराई का स्थल रहा है। जाड़े और बरसात में लोग अपने पशुओं को लेकर यहां आते थे और गर्मियों में मच्छरों के कारण वापस लौट जाते थे। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, अंग्रेजों ने 1932 में यहां के निवासियों को चराई माफ कर दी थी, जिसका उल्लेख वन विभाग की कार्य योजना में आज भी मौजूद है।

देश आजाद होने के बाद से बिंदुखत्ता के लोग अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। 1951 में यहां प्राथमिक विद्यालय खोला गया। राज्य आंदोलन के दौरान पंडित नारायण तिवारी जी के दिशा-निर्देशन में यहां बिजली और सड़कों का जाल बिछा। आज यहां इंटर कॉलेज, आईटीआई, पोस्ट ऑफिस, बैंक, अस्पताल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इतनी सुविधाओं के बावजूद यहां के लोग केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं। सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और उनकी मरम्मत के लिए धनराशि जारी नहीं होती।

स्थानीय लोग वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत अपने गांव को राजस्व गांव घोषित कराने की कार्यवाही में जुटे हैं दो सालों से ये मामला शासन स्तर पर लंबित है। सरकार उक्त क्षेत्र को डिफॉरेस्ट कर राजस्व गांव बनाने की बात कर रही है, जो बहुत जटिल प्रक्रिया है। जबकि पूरे देश में 2006 के बाद इस अधिनियम के तहत लगभग 1500 से अधिक वन गांवों को राजस्व गांव में बदला जा चुका है और लगभग तीन करोड़ एकड़ भूमि राजस्व भूमि घोषित हो चुकी है। इसी मांग को लेकर 18 फरवरी को स्थानीय लोगों ने व्यापक आंदोलन किया था।

 

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