फ्रांस से अल्मोड़ा आई बारात, श्रीपूर्णा जोशी ने पेरिस के और्हेल्यै के साथ लिए सात फेरे, कुमाऊं कल्चर में रंगे फिरंगी
ALMORA: शादी विवाह केवल दो दिलों का मिलन नहीं बल्कि संस्कृतियों का भी संगम होता है। शुक्रवार को अल्मोड़ा में एक ऐसी शादी हुई जिसमें सात समंदर पार पेरिस से बारात कसारदेवी आई, विदेशी दूल्हे का हल्दी हाथ हुआ, छोलिया की धुन विदेशी मेहमान थिरकते रहे और पहाड़ की लड़की ने गोरे लड़के को वरमाला पहनाकर जीवन साथी चुना। अल्मोड़ा की श्रूपीर्ण जोशी और पेरिस के और्हेल्यै का अंतरराष्ट्रीय विवाह चर्चा का केंद्र बना हुआ है ।
भारत से करीब साढ़े 6 हजार किलोमीटर दूर पेरिस, फ्रांस से बारात अल्मोड़ा पहुंची, जहां कसार देवी स्थित एक रिसॉर्ट में पारंपरिक कुमाऊंनी रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। चीनाखान निवासी ओएनजीसी से रिटायर्ड डीजीएम ध्रुव रंजन जोशी की पुत्री श्रीपूर्णा जोशी ने फ्रांस निवासी और्हेल्यै गुरेलिएन के साथ 12 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चार और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। विवाह समारोह में ढोल-दमाऊं की गूंज और छोलिया नृत्य ने आयोजन को पूरी तरह कुमाऊंनी रंग में रंग दिया।

पारंपरिक वेशभूषा में विदेशी मेहमान
फ्रांस से पहुंचे 25 से अधिक मेहमानों ने भी भारतीय परंपराओं को अपनाया। विदेशी महिलाओं ने साड़ी, घाघरा-चोली और पिछौड़ा पहना, जबकि पुरुष मेहमान कुर्ता-पायजामा और शेरवानी में नजर आए। बारात जब पारंपरिक बाजों-गाजों के साथ विवाह स्थल पहुंची तो विदेशी मेहमानों ने भी जमकर नृत्य किया।
इस अंतरराष्ट्रीय विवाह ने न केवल दो व्यक्तियों को, बल्कि दो देशों और संस्कृतियों को भी एक सूत्र में बांध दिया। स्थानीय लोगों ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पहाड़ी व्यंजन, लोक संगीत और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने विदेशी मेहमानों को कुमाऊंनी संस्कृति से रूबरू कराया। अल्मोड़ा में संपन्न यह विवाह अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रेम की उस भावना को दर्शाता है, जिसकी कोई सरहद नहीं होती।
