सीएम धामी बोले, सियासत का प्रोफेसर नहीं, अभी तो राजनीति सीख ही रहा हूं

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MUSSOORIE : सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में डिजिटल प्रदर्शनी एवं सेमिनार का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने यहां मौजूद प्रशिक्षुओं को संबोधित किया। इस दौरान सीएम धामी ने केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों को गिनाया। सीएम ने कहा कि वे अभी भी राजनीति सीख रहे हैं। सीएम ने यहां पर 22 राज्यों द्वारा लगाए गए हस्तकला स्टाल का अवलोकन भी किया।

अकादमी के प्रशिक्षुओं से मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही आपका शिक्षण कार्य संपन्न हो जाए, लेकिन प्रशिक्षण यानी सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रहता रहा है। सीएम धामी ने यहां प्रशिक्षुओं से मजाकियां अंदाज में कहा कि- मैं यहां आपको बोर करने नहीं करने नहीं आया हूं। सीएम ने कहा कि जैसे आप प्रशिक्षण ले रहे हैं, मैं भी अभी राजनीति में प्रशिक्षण ले रहा हूँ। कहा कि राजनीति के क्षेत्र में कई लोग अपने आप को प्रोफेसर मानते हैं, लेकिन मैं खुद को प्रोफेसर नहीं बल्कि 10वीं-12वीं के स्टूडेंट की तरह ही समझता हूं। सीएम की इस बात हॉल में खूब तालियां बजीं।

इंसान अपने पूरे जीवन में सीखता है। क्योंकि सीखने का दौर कभी खत्म नहीं होता। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि वह देश की एक प्रमुख सेवा में जाएंगे, जिसके माध्यम से उन्हें लोगों की सेवा करने का मौका मिलेगा। सीएम धामी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्रों में से एक है। हम किसी भी देश को देख लें, अंतर अपने आप समझ में आ जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कमिटमेंट दिखाते हुए कहा कि हमने सरलीकरण, समाधान, निस्तारिकरण एवं संतुष्टि को अपनी कार्यपद्धति का सिद्धांत बनाया है और इसी मूल मंत्र को आधार बना कर जनसमस्याओं को सुलझाया जा रहा है। उन्होनें कहा  आप सभी भी आने वाले समय में सरलीकरण, समाधान, निस्तारिकरण मंत्र के साथ जन सेवा करेंगे ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। उन्होनें कहा हम उत्तराखंड के सतत और सर्वांगीण विकास का विकल्प रहित संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं और अपने इस संकल्प को हम समयबद्ध अवधि में निश्चित ही सिद्ध कर के दिखाएंगे।

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन से “मिशन कर्मयोगी” के अन्तर्गत एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के साथ  समृद्ध भारतीय संस्कृति की व्यापक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने हेतु डिजिटल प्रदर्शनी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि आप लोग “आजादी का अमृत महोत्सव” वर्ष में प्रशिक्षण प्राप्त कर “मिशन कर्मयोगी” के तहत अपना काम शुरू करेंगे। उन्होनें कहा आगामी 25 वर्ष में यह देश जितना विकास करेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका आप सभी अधिकारियों की होगी। भारतीय सिविल सेवकों को और भी अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना “मिशन कर्मयोगी” का मुख्य लक्ष्य है।

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