गढ़वाल यूनिवर्सिटी में बोले CDS  जनरल अनिल चौहान, दीर्घकालिक युद्ध के साथ स्मार्ट टेक वॉर के लिए तैयारी जरूरी

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SRINAGAR:  भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान शनिवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां चौरास परिसर में सीडीएस जनरल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर छात्र-छात्राओं से विस्तृत संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन भारतीय सामरिक परंपरा, चाणक्य नीति और आधुनिक युद्ध रणनीति पर विशेष प्रकाश डाला।

विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सीडीएस जनरल चौहान कोचौरास परिसर में एनसीसी कैडेट्स की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने युवाओं केसाथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवाद किया। जनरल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामरिक सोच को जन-जन तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि पौराणिक काल से ही भारत में सामरिक चिंतन और शोध होते आए हैं। धनुर्वेद में व्यूह रचना, धनुर्विद्या और सेना संचालन का विस्तृत वर्णन मिलता है। वहीं अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में राज्य संरक्षण, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक सोच का स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने कहा कि चाणक्य की रणनीतिक दृष्टि की झलक आज भी भारत की विदेश नीति में दिखाई देती है।

सीडीएस जनरल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण घेरों की चर्चा की। पहला बाहरी घेरा, जो दीर्घकालीन आंकलन और रणनीतिक दृष्टि से जुड़ा है, जिसमें कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक शामिल हैं। दूसरा मध्य घेरा, जो राष्ट्र की रक्षा व्यवस्था से संबंधित है। और तीसरा आंतरिक घेरा, जो आत्मनिर्भरता, सेनाओं की संरचना और युद्ध योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा है।

सीडीएस ने कहा कि बदलते समय में युद्ध के स्वरूप भी बदल रहे हैं। पारंपरिक युद्धों के स्थान पर अब इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस और सूचना आधारित युद्ध प्रमुख हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौती है, जिन्होंने भारतीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है और दावे किए हैं। ऐसे में परमाणु संतुलन के कारण लंबे युद्ध की संभावना कम होती है, लेकिन आंतरिक अस्थिरता, आतंकवाद और सीमा विवाद जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि देश को दीर्घकालीन युद्ध की तैयारी रखनी चाहिए, साथ ही छोटे और स्मार्ट युद्ध की रणनीति पर भी फोकस करना आवश्यक है।

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